फर्जी आधार सेंटर के मामले में बड़ा खुलासा: नकली फिंगरप्रिंट की मदद से लगाते थे चूना

फर्जी आधार सेंटर के मामले में बड़ा खुलासा: नकली फिंगरप्रिंट की मदद से लगाते थे चूना

By: Rohit saklani
September 13, 07:09
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NEW DELHI: यूपी में फर्जी आधार कार्ड बनाने के मामले में कई बड़े खुलासे हुए हैं। जांच कर रहे अधिकारी ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया है कि गिरोह के सदस्यों ने न केवल आवेदन करने के लिए सुरक्षित 'source code' का इस्तेमाल किया था, बल्कि जिलेटिन जैल, लेजर और सिलिकॉन की मदद से आवेदकों के नकली फिंगरप्रिंट भी तैयार किए थे। 

आपको बता दें रविवार को यूपी ATS ने कानपुर से फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले इस गिरोह के मास्टरमाइंड सौरभ सिंह समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। STF ने मौके से जाली फिंगर प्रिंट वाला सॉफ्टवेयर, रेटिना स्कैनर भी बरामद किया था। STF के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक त्रिवेणी सिंह ने बताया कि जांच के दौरान इस गिरोह से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे भी हुए हैं। 

जांच के दौरान पता चला कि आरोपी आधार कार्ड बनाने के लिए निधार्रित मानकों को बाईपास करते हुए बायोमेट्रिक डिवाइस के माध्यम से अधिकृत ऑपरेटर्स के फिंगर प्रिन्ट ले लेते थे। इसके बाद उसका पेपर पर लेजर प्रिंटर से प्रिंट आउट निकालते हैं। सिंह ने कहा कि हैंकर्स अनधिकृत ऑपरेटर्स से फिंगर प्रिंट के बदले 5-5 हजार रुपये लेते थे। त्रिवेणी सिंह ने कहा कि अब पूरे आधार इनरोलमेंट प्रॉसेस की सिक्योरिटी ऑडिट कराई जाएगी। 

जांच अधिकारी ने बताया कि ये गिरोह नकली फिंगर प्रिन्ट का प्रयोग करके आधार कार्ड की वेबसाइट पर लॉगिन करते हैं। फिर आधार कार्ड के इनरोलमेंट की प्रकिया पूरी कर लेते है, जो नकली फिंगर प्रिन्ट तैयार किया गया है वो ऑपरेटर के मूल फिंगर प्रिन्ट की तरह ही काम करता है। वेब सुरक्षा विशेषज्ञों की माने तो UIDAI एक प्रबुद्ध Source Code पर कार्य करता है। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि Source Code केवल मुख्य टीम के पास उपलब्ध होता है। STF ने दावा किया है कि वैसे तो UIDAI ने हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर से संबंधिक कई सुरक्षा दी है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। आपको बता दें हालही में सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी की सुरक्षा को लेकर मौलिक अधिकार को गोपनीयता का अधिकार घोषित किया।

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