अब अश्लीलता वाला गाना नहीं चलेगा...कलाकारों ने बनाया संगठन

अब अश्लीलता वाला गाना नहीं चलेगा...कलाकारों ने बनाया संगठन

By: Kumar Gautam
September 14, 07:09
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 PATNA: लोक कलाकार बनना है तो अश्लील गाना छोड़ें....समाज में लोक गायकों और कलाकारो ने संगठन बनाते हुए संकल्प लिया। कलाकारों को एकजुट करते हुए इसकी शुरुआत बिहार के मुजफ्फरपुर से हुई है। अश्लील गाना गाने पर लोक कलाकार की उपाधि छिन जाएगी। लोक कला की आड़ में अश्लीलता परोसने वालों को पकड़ने के लिए सूबे के सभी कलाकार एक मंच पर आए हैं।

मुजफ्फरपुर में बुधवार को मोतिहारी, सीतामढ़ी, सारण, वैशाली, समस्तीपुर समेत विभिन्न जिले के लोक कलाकारों का जमावड़ा लगा। इसमें भोजपुरी, मैथिली के गायक समेत विभिन्न विधा के लोक कलाकर शामिल हुए। इसमें अश्लीलता पर रोक लगाने के लिए कलाकारों ने एक संगठन का निर्माण किया। महेश भगत बनवारी लाल कॉलेज में हुए इस आयोजन में लोकगीतों की महफिल भी सजी। तेल बिना दीया जैसे माय बिना धीया, हमरो हो भइया पढ़लो बिना जिन्दगी बेकार... शिक्षा के महत्व को बताते इस गीत के साथ ही कई अन्य लोकगीतों को लोक कलाकारों ने समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने का माध्यम बनाया है। लोक गायक मिश्रीलाल व्यास ने कहा कि लोकगीत और भ्रूण हत्या, अशिक्षा, दहेज जैसी चीजों के खिलाफ जागरूकता फैलाया जाएगा। इसीलिए भोजपुरिया व्यास एवं कलाकार एकता संगठन समिति बनाया गया है।

वैशाली से लोक कलाकार जर्नादन सिंह ने कहा कि समाज से अश्लीलता को दूर रखना हमारा पहला कर्तव्य है। सारण से आए प्रेमशंकर दास ने कहा कि समाज सुधार में कलाकारों की अहम भूमिका होती है। मोतिहारी से आए उमेश साह ने कहा कि ऐसे कलाकार जो अश्लीलता परोसते हैं, उन्हें लोक कलाकार की उपाधि नहीं दी जाएगी। गौरतलब है कि अश्लील गानों से लोक कलाकारों को बाहर में कई समस्याओं से जूझना पड़ता था।

 

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