अभी-अभीः JDU का लालू पर तंज, कहा- सेवक तो हो गए जेल से बाहर, अब किससे करवाएंगे मालिश

अभी-अभीः JDU का लालू पर तंज, कहा- सेवक तो हो गए जेल से बाहर, अब किससे करवाएंगे मालिश

By: Sudakar Singh
January 11, 12:01
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Live Bihar Desk : रांची के बिरसा मुंडा जेल से लालू यादव के दोनों सेवकों मदन और लक्षमण को निकला दिया गया है। जेल से बाहर निकलने के बाद दोनों कहां गए है ये कोई नहीं जानता है। फिलहाल पुलिस दोनों को तलाश रही है। वहीं दूसरी तरफ इस मामले पर जदयू ने लालू यादव पर हमाल बोला है। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि अब लालू किससे मालिश करवाएंगे? लालू के फर्जीवाड़े का अब पर्दाफाश हो गया है। पहले तो लालू ने गरीब लोगों का जमीन अपने नाम करवा लिया और अब फर्जीवाड़े से सेवादारों को मालिश करवाने के लिए जेल बुला लिया और जब खुलासा हुआ तो ये सब किया।

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फर्जी केस दर्ज कर मदन-लक्ष्मण को भेजा गया जेलः
आपको बता दें कि फर्जी केस के आधार पर मदन और लक्ष्मण के जेल जाने की खबर मीडिया में आने के बाद हरकत में आई पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू की। पुलिस ने जांच में पाया कि दोनों ने अपने खिलाफ झूठा केस दर्ज करवाया ताकि वे जेल के अंदर जा सके। जेल से बाहर आने के बाद लालू यादव के दोनों सेवकों का कुछ पात नहीं चल रहा है। पुलिस दोनों को ढ़ूंढ रही है। पुलिस मदन और लक्ष्मण के साथ-साथ उनपर मारपीट और 10 हजार रुपए की छीनतई करने का आरोप लगाने वाले सुमित यादव को भी ढूंढ रही है। 

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केस मे दर्ज घटना के समय सबका मोबाइल लोकेशन था अलग-अलगः 
जानकारी के मुताबिक पुलिस ने जांच के दौरान सुमित और लालू यादव के दोनों सेवकों के मोबाइल नंबर का डिटेल निकलवाया। सभी के मोबाइल लोकेशन से पता चला कि जिस घटना को बिंदु बनाकर केस दर्ज किया गया था उस समय ये तीनों एक साथ थे ही नहीं। तीनों को मोबाइल लोकेशन अलग-अलग जगह था। इससे ये साबित हो गया कि दोनों ने जेल के अंदर जाने के लिए ही अपने खिलाप झूठा मामला दर्ज करवाया। 

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क्या है मामलाः
23 दिसम्बर को लालू के जेल जाने से पहले मदन यादव और लक्ष्मण कुमार दोनों बिरसा मुंडा जेल पहुंच गये थे। इसके लिए फर्जी मारपीट के मुकदमे का सहारा लिया गया था। सुमित यादव नाम के एक शख्स ने दोनों के ऊपर मारपीट और रुपये छीनने का मुकदमा रांची के लोअर बाजार थाने में दर्ज कराया था। जिसके बाद कोर्ट में सरेंडर होकर मदन और लक्ष्मण लालू की सेवा करने बिरसा मुंडा जेल पहुंच गये थे।

ये देवघर कोषागार मामले में लालू प्रसाद के जेल जाने की आशंका के मद्देनजर साजिश रचकर किया गया था। लेकिन दोनों को जेल में लालू की सेवा करने का मौका नहीं मिला। मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने जांच की तो पाया कि मारपीट का मामला फर्जी था और इस सिलसिले में झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।   

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