जज ने कहा- मिठाई खाकर आओ तब सुनाएंगे फैसला, लौटे तो साथ रहने को राजी हो गए

जज ने कहा- मिठाई खाकर आओ तब सुनाएंगे फैसला, लौटे तो साथ रहने को राजी हो गए

By: Manish Pandey
July 03, 06:07
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PATNA : तलाक के लिए 4 वर्षों से केस लड़ रहे थे। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पहले भरपूर समझाया। माता-पिता उपस्थित अन्य परिजनों के समक्ष साथ रहने की नसीहत दी। फिर भी जब दोनों ने कोई पहल नहीं की तो जज ने कहा कि साथ मंदिर में जाकर पूजा करो।

रेस्टोरेंट से मिठाई खाकर और साथ में घूमकर आओ, उसके बाद फैसला सुनाएंगे। जज के आदेश को मानते हुए दोनों मंदिर गए। पूजा के बाद रेस्टोरेंट में जाकर मिठाई खाई। इस दौरान हुई बातचीत में दोनों का मन बदल गया। लौटने पर लिखकर दिया कि वे फिर से साथ रहना चाहते हैं।

बता दें कि परिवार न्यायालय के जज सतीश चंद्र श्रीवास्तव 400 से अधिक दंपतियों के विवाद को सुलझाकर उनका घर टूटने से बचा चुके हैं। इसके लिए इन्होंने कुछ इसी तरह के नुस्खे अपनाए। दोनों को बार-बार आपस में बातें करने, साथ घूमने, रेस्टोरेंट में मिठाई खाने, मंदिर जाकर पूजा करने जैसी सलाह दी। इनका परिणाम भी सकारात्मक रहा। अधिकतर मामलों में दंपती ने दोबारा साथ रहने का फैसला किया। सकरा के उपरोक्त दंपती के बीच 4 वर्षों से तलाक समेत एसडीएम कोर्ट में एक अन्य मुकदमा भी चल रहा था।

न्यायाधीश सतीश चंद्र श्रीवास्तव ने दोनों को चैंबर में बुलाकर समझाया, शादी के बाद के सुनहरे पलों को याद करने के लिए कहा। फिर साथ में मंदिर जाकर पूजा करने, रेस्टोरेंट में मिठाई खाने घूमने-फिरने की सलाह दी और दोबारा 19 जून को कोर्ट में आने का आदेश दिया। उक्त तिथि को दोनों ने कहा कि उन्होंने साथ रहने का फैसला कर लिया है। इसके लिए पति-पत्नी ने जज को लिखित दे दिया। उसके बाद जज ने लोक अदालत में केस समाप्त करने के लिए सूचीबद्ध कर लिया। 8 जुलाई को लोक अदालत में चार साल पुराना यह केस समाप्त हो जाएगा।

इस संबंध में परिवार न्यायालय के न्यायाधीश सतीशचंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि सामाजिक परंपरा कानून की आत्मा है। सोशल जस्टिस के तहत टूट रहे परिवारों को जोड़ने के उद्देश्य से मिठाई खाने साथ घूमने के लिए कहा जाता है। अपने देश में महिलाओं को पूजने की परंपरा रही है। ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर तनाव पैदा होना उचित नहीं है। सकारात्मक पहल की जरूरत है। पति-पत्नी की काउंसेलिंग कर मन की दूरियां मिटाने का काम किया जा रहा है।

अब तक 400 से अधिक जोड़ों का परिवार टूटने से बचाने में सफलता मिली है। 29 को एक अन्य मामले की है सुनवाई।  दो वर्षों से चल रहे एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए जज ने 21 जून को सरैया के दंपती को भी कुछ इसी तरह की सलाह दी। पति को कहा- ससुराल से पत्नी की विदाई करा अपने घर लाओ। फिर साथ रहकर ईद के बाद 29 जून को कोर्ट में आओ। उसके बाद फैसला सुनाएंगे। इस मामले में भी दंपती का अब तक सकारात्मक रुख बताया जा रहा है।
 

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